सुप्रभात मित्रो सभी को राधे राधे 🙏🙏🙏
🌻“असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्।अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।।” 🌻
अर्थ:-भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि हे महाबाहु! इसमें कोई संदेह नहीं कि मन बहुत चंचल और कठिनता से वश में होने वाला है। लेकिन हे कुंतीपुत्र ! इसे निरंतर अभ्यास और वैराग्य के द्वारा काबू में किया जा सकता है।
पूज्य गुरुजी ने भी मन को काबू करने का सत्य मार्ग बताया ।
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