लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी स्वाधीनता संग्राम के उन अग्रणी नायकों में थे, जिन्होंने आज़ादी के आंदोलन में युवाओं को संगठित और प्रेरित करने के साथ-साथ स्वभाषा, स्वदेशी और स्वसंस्कृति के लिए भी आजीवन संघर्ष किया।
"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" उनके इस उद्घोष ने पूरे राष्ट्र की चेतना को झकझोर कर स्वाधीनता की भावना को जन-जन तक पहुँचाया। गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती जैसे आयोजनों से उन्होंने राष्ट्रीय जागरण का अभूतपूर्व कार्य किया। उनका कालजयी ग्रंथ ‘गीता रहस्य’ आज भी हमें कर्तव्यपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
लोकसेवा व राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक तिलक महाराज जी की जयंती पर उन्हें कोटिश नमन।
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