ब्रह्मचारी कौन??
अधिकांश लोग मानते हैं कि ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल अविवाहित रहना य्या पति-पत्नी के बिच के शारीरिक सम्बन्धों का पूर्ण त्याग है।
जबकि यह धारणा अधूरी और भ्रमक है।
ब्रह्मचर्य का वास्तविक अर्थ है मन की बहिर्मुखी प्रवृत्तियों को अंतर्मुखी बनाकर उसे पूर्णतः ब्रह्म की ओर प्रवाहित करना।
जन मन बाहरी विषयों, इन्द्रिय सुखों और भौतिक आकर्षण में उलझा रहता है, तब वह अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाता है, पर जब वही मन सूक्ष्म चेतना की ओर मुड़ता है, तब वह ब्रह्म के निकट पहुंचने लगता है।
यही ब्रह्मचर्य का सार है।
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