“अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा” - कल प्रयागराज में एक छात्र ने मुझसे यही कहा। सालों की तैयारी, घर की ज़मीन बेची, माँ-बाप का कर्ज़ और फिर भी हाथ में कुछ नहीं।
यह हार उसकी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हार है जिसने उसकी मेहनत का दाम देने से इनकार कर दिया।
तेरह दिन हो गए - गृह मंत्री अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। मोदी जी माफी मांगने की जगह क्षमा बाँट रहे हैं।
@AmitShah जी, यह मत समझिए कि हम जवाबदेही मांगना बंद कर देंगे। राजधानी की सड़कों पर बच्चों पर लाठियां और पैलेट चले - और आपने एक शब्द नहीं कहा। आज नहीं तो कल, इस जुर्म का जवाब आपको देना ही पड़ेगा।
छात्र देश की रोशनी हैं, और मैं उनकी पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूं।
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ChhatronKiGoonj#